कर्मठ भुज

जन होता सबसे अमूल्य धन 

सब जन खूब कमाते। 

सब अशंक रहते अभाव से

सब इच्छित  सुख पाते।

नर नारी का भेद नहीं 

होता सब मात्र मनुज ही। 

भाग्य लेख होता ना मनुज का 

होता कर्मठ भुज ही।।

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