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National Youth Day राष्ट्रीय युवा दिवस

 उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में जब देश में दासता और गरीबी के कष्टों का गहराई से अनुभव किया जाता था।  उस समय एक महापुरुष ने आवाज दी थी - "उठो ! जागो ! और तब तक न रुको  जब तक अपना लक्ष्य न प्राप्त कर लो। वे थे स्वामी विवेकानन्द। उन्होंने कहा था कि यह देश निश्चित ही फिर उठेगा और ऐसा उठेगा कि दुनिया देखकर दंग रह जाएगी स्वामी जी का आज ही के दिन दिन सन 1918 से 363 ईस्वी को महा संक्रांति के पुण्य पर्व पर कोलकाता के दत्त परिवार में हुआ था स्वामी जी के जन्मदिन को ही युवा दिवस के रूप में मनाने के लिए हम सभी यहां एकत्र स्वामी विवेकानंद के बचपन का नाम नरेंद्र नाथ था नरेंद्र नाथ ने सन 18 सो 89 में प्रथम श्रेणी में हाई स्कूल पास किया कॉप्टिक चर्च मिशनरी बोर्ड के एक कॉलेज में दाखिल हुए वहां के प्रिंसिपल हिस्ट्री ने पहली बार नरेंद्र नाथ को रामकृष्ण परमहंस के बारे में बताया था श्री रामकृष्ण परमहंस के प्रेरणा पूर्ण संपर्क से नरेंद्र नाथ की सभी संकाय मिट गई और उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन कर्म द्वारा सेवा में लगाने के लिए आजन्म ब्रह्मचारी रहने का व्रत लिया 16 अगस्त 18 से 86 में 5 वर्षों तक...

महाराजा अजमीढ़ जयन्ती

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महाराजा अजमीढ़ तुम्हें हम शीश नवाए स्वर्ण कला के कुलभूषण हम तुम्हें बुलाएं देश बचाओ जाति बचाओ और समाज को दूर करो छल दंभ द्वेष पाखंड स्वार्थ को था भारत सोने की चिड़िया इसे गड़ा होगा तुमने की प्रसिद्ध yah भूमि बड़ा होगा तुमने सभी ग्रंथ प्राचीन तुम्हें युगपुरुष बताएं महाराजा अजमेर तुम्हें हम शीश नवाए सर्वप्रथम तुम धन्य करो इस पुण्य धरा को सोना उगले चांदी उगले और हीरा को मिट जाए बेकारी सब जन रोजी पाए महाराजा अजमीढ़ तुम्हें हम शीश नवाए दानव दहेज नारी हत्या अभिमान कपिल ना पाए चार चतुर्दस खत्म करें सब स्वर्णकार कहलाए महाराजा अजमीढ़ तुम्हें हम शीश नमन

पुनः शांति फैलाओ

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हे अंबे! इस पुण्य धरा पर ऐसी ज्वाल जलाओ। लड़ मर जाएं सब आतंकी पुनः शांति फैलाओ ।। तुमने शुम्भ निशुंभ बिगारे  तुमने भस्मासुर संहारे।  तुमही मां अबके भस्मासुर के सिर हाथ धराओ ।। हैं सब पुण्य धरा में धर्मी कुछ पाकी आए बेधर्मी।  आड़ धर्म का नाम धर्म का किंतु काम सारा अधर्म का।   मां इन तक धर्म विरोधी तत्वों से तुम धरा बचाओ।। पुण्य धरा में ओ आतंकी बंद करो अपनी नौटंकी।  नहीं चाहता हाथ मलो तुम और पीछे पछताओ।  धन्य धरा भारत की जिसमें सभी ग्रंथ पलते हैं।  हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई साथ साथ चलते हैं।। धर्म धरे सब भारतवासी और अधर्म हटाओ।  छोड़े सब अपने जिहाद को, कपिल क्रांति करवाओ।। प्यार प्रीति की रीति नीति की धर्म ध्वजा फहराओ। लड़ मर जाएं सब आतंकी पुनः शांति फैलाओ ।। © कपिल राज सोनी

कर्मठ भुज

जन होता सबसे अमूल्य धन  सब जन खूब कमाते।  सब अशंक रहते अभाव से सब इच्छित  सुख पाते। नर नारी का भेद नहीं  होता सब मात्र मनुज ही।  भाग्य लेख होता ना मनुज का  होता कर्मठ भुज ही।। ©