पुनः शांति फैलाओ

जय माँ दुर्गे

हे अंबे! इस पुण्य धरा पर ऐसी ज्वाल जलाओ।

लड़ मर जाएं सब आतंकी पुनः शांति फैलाओ ।।


तुमने शुम्भ निशुंभ बिगारे  तुमने भस्मासुर संहारे। 

तुमही मां अबके भस्मासुर के सिर हाथ धराओ ।।


हैं सब पुण्य धरा में धर्मी कुछ पाकी आए बेधर्मी। 

आड़ धर्म का नाम धर्म का किंतु काम सारा अधर्म का। 

 मां इन तक धर्म विरोधी तत्वों से तुम धरा बचाओ।।


पुण्य धरा में ओ आतंकी बंद करो अपनी नौटंकी। 

नहीं चाहता हाथ मलो तुम और पीछे पछताओ। 


धन्य धरा भारत की जिसमें सभी ग्रंथ पलते हैं। 

हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई साथ साथ चलते हैं।।


धर्म धरे सब भारतवासी और अधर्म हटाओ। 

छोड़े सब अपने जिहाद को, कपिल क्रांति करवाओ।।


प्यार प्रीति की रीति नीति की धर्म ध्वजा फहराओ।

लड़ मर जाएं सब आतंकी पुनः शांति फैलाओ ।।

© कपिल राज सोनी

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