महाराजा अजमीढ़ जयन्ती
महाराजा अजमीढ़ तुम्हें हम शीश नवाए
स्वर्ण कला के कुलभूषण हम तुम्हें बुलाएं
देश बचाओ जाति बचाओ और समाज को
दूर करो छल दंभ द्वेष पाखंड स्वार्थ को
था भारत सोने की चिड़िया इसे गड़ा होगा तुमने
की प्रसिद्ध yah भूमि बड़ा होगा तुमने
सभी ग्रंथ प्राचीन तुम्हें युगपुरुष बताएं
महाराजा अजमेर तुम्हें हम शीश नवाए
सर्वप्रथम तुम धन्य करो इस पुण्य धरा को
सोना उगले चांदी उगले और हीरा को
मिट जाए बेकारी सब जन रोजी पाए
महाराजा अजमीढ़ तुम्हें हम शीश नवाए
दानव दहेज नारी हत्या अभिमान कपिल ना पाए
चार चतुर्दस खत्म करें सब स्वर्णकार कहलाए
महाराजा अजमीढ़ तुम्हें हम शीश नमन

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