दिल की लहर - बसन्त

 मेरे दिल की लहर से निकली तरंग 

बसंत में निकले मयूर मेरे संग | 

सूखी डालियों में निकले पत्ते नवीन

हर्षित हो मन गाये गीत रंगीन || 


आयी है बसंत पंचमी 

ले आई यह रंग सप्तमी | 


पूजन करूँ माँ सरस्वती का आज 

जिनसे होता है सब काज | 

गौरी पुत्र गणेश सुनो लेखकराज 

कृपा करो गणनायक सब पर आज || 


मैं  हूँ माँ के चरणों का दास 

जिनका है कण कण में वास || 


                                       - कपिल राज सोनी 

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